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BHIC-101 Unit-7 Notes | नंद और मौर्य साम्राज्य (Nanda & Mauryan Empire) | IGNOU History Notes for UPSC

IGNOU BHIC-101 | Unit-7 नंद और मौर्य साम्राज्य (Nanda & Mauryan Empire)

IGNOU BHIC-101 Unit 7 Notes in Hindi: यह यूनिट नंद और मौर्य साम्राज्य (Nanda and Mauryan Empire) पर आधारित है, जो IGNOU B.A. History (Hons.) के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस यूनिट में प्राचीन भारत के राजनीतिक केन्द्रीयकरण, प्रशासनिक संगठन, आर्थिक समृद्धि और साम्राज्य निर्माण की प्रक्रिया का विस्तृत अध्ययन किया गया है।

इस खंड में नंद वंश की उत्पत्ति, महापद्म नंद की नीतियाँ, तथा मौर्य साम्राज्य के उदय, विशेषकर चंद्रगुप्त मौर्य, चाणक्य (कौटिल्य) और अशोक के प्रशासनिक व सांस्कृतिक योगदान की चर्चा की गई है। साथ ही, अर्थशास्त्र, अशोक के शिलालेख, साम्राज्य का विस्तार, कर-व्यवस्था, सेना-संगठन और धर्म-नीति जैसे प्रमुख विषयों को विस्तार से समझाया गया है।

यह सामग्री न केवल IGNOU छात्रों के लिए बल्कि UPSC, SSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। इन नोट्स को IGNOU Syllabus और UPSC Ancient History Syllabus दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी नंद–मौर्य काल के राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक ढाँचे को गहराई से समझ सकें।

नीचे दिए गए नोट्स में विषयवार संक्षिप्त व्याख्या, प्रमुख तथ्य, तथा परीक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक बिंदु शामिल किए गए हैं — जो आपके IGNOU Assignments और UPSC Prelims–Mains दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होंगे। 

BHIC-101 | Unit-7 – नंद और मौर्य साम्राज्य (Nanda and Mauryan Empire)


परिचय (Introduction)

बौद्ध-जैन युग के बाद भारतीय इतिहास में एक नया चरण शुरू होता है —
राजनीतिक एकता और साम्राज्य निर्माण का युग।
यह प्रक्रिया मगध राज्य से प्रारंभ हुई जिसने क्रमशः
हरी्यक, शिशुनाग, नंद और अंततः मौर्य वंश के रूप में विकसित होकर
पहली बार पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक साम्राज्य में संगठित किया।


नंद वंश (Nanda Dynasty)

समयावधि:

लगभग 345 ई.पू. – 321 ई.पू.

प्रमुख शासक:

महापद्म नंद — नंद वंश का संस्थापक।
उसे “एकच्छत्र नृप” कहा गया है।

स्रोत:

  • पुराण, महाबोधिवंश, बौद्ध ग्रंथ

  • यूनानी लेखक क्विंटस कर्टियसडायोडोरस के उल्लेख।


प्रशासन व नीति:

  1. केंद्रीकृत प्रशासन – कर-संग्रह व विशाल सेना।

  2. करों की अनेक श्रेणियाँ: भूमि कर, व्यापार कर, श्रम कर।

  3. नगरों व मार्गों का रख-रखाव राज्य के नियंत्रण में।

  4. विशाल सेना – यूनानी स्रोतों के अनुसार:

    • 2 लाख पैदल सेना

    • 20 हज़ार घुड़सवार

    • 3 हज़ार हाथी

    • 2 हज़ार रथ

यह संगठन बाद में मौर्य प्रशासन की नींव बना।


नंद वंश का पतन:

  • नंदों की अत्यधिक कर नीति और जनअसंतोष।

  • सत्ता में भ्रष्टाचार और विलासिता।

  • इन्हीं कारणों से चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य ने उन्हें अपदस्थ कर
    मौर्य साम्राज्य की स्थापना की (321 ई.पू.)।


मौर्य साम्राज्य (Mauryan Empire)

संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य (321 – 297 ई.पू.)


(A) चंद्रगुप्त मौर्य

  1. स्रोत: अर्थशास्त्र (कौटिल्य), इंडिका (मेगस्थनीज़), जैन ग्रंथ परिशिष्टपर्व

  2. राजनीतिक विस्तार:

    • मगध से प्रारंभ कर उत्तर भारत तक नियंत्रण।

    • सिकंदर के सेनापति सेल्युकस निकेटर को पराजित किया।

    • सेल्युकस संधि (305 ई.पू.) – चार प्रदेश प्राप्त (कंधार, हेरात, बल्ख, परोपमिसाद)।

  3. धार्मिक जीवन: जैन धर्म की ओर झुकाव, अंतिम समय श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में निर्वाण।

  4. महत्त्व: पहला अखिल भारतीय साम्राज्य स्थापित किया।


(B) बिंदुसार (297 – 273 ई.पू.)

  • चंद्रगुप्त का पुत्र।

  • यूनानी लेखकों के अनुसार “Amitrochates” (अमित्रघात)।

  • साम्राज्य को दक्षिण भारत तक बढ़ाया।

  • धार्मिक रूप से आजीवक पंथ का अनुयायी माना जाता है।


(C) अशोक महान (273 – 232 ई.पू.)

प्रमुख घटनाएँ:

  1. कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) – 1 लाख मृत्यु, अशोक का हृदय परिवर्तन।

  2. धम्म नीति:

    • अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता, समानता का संदेश।

    • प्रजा के नैतिक उत्थान हेतु “धम्ममहामात्र” नियुक्त।

  3. शिलालेख:

    • 33 शिलालेख – ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी व अरामाइक लिपि।

    • प्रमुख – गिरनार, धौली, सारनाथ, सोपारा, कौशांबी।

  4. धर्म प्रचार:

    • श्रीलंका, म्यांमार, सीरिया, मिस्र तक बौद्ध धर्म का प्रसार।

    • पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।


प्रशासनिक ढाँचा (Based on Arthashastra & Inscriptions)

संस्था

कार्य

राजा

सर्वोच्च शासक, धर्मानुकूल शासन

मंत्रिपरिषद

नीति-निर्माण व प्रशासन

अमात्य

उच्च अधिकारी

धर्ममहामात्र

जनकल्याण व नैतिक नीति

जनपद व नगरपाल

स्थानीय प्रशासन

सेनापति

सेना प्रमुख

प्रशासन की विशेषताएँ:

  • केंद्रीकरण,

  • गुप्तचर तंत्र (संचार-जाल),

  • राजस्व प्रणाली – भूमि मापन, कर-संग्रह, सिंचाई।


मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था

  1. कृषि: राज्य का प्रमुख राजस्व स्रोत।

  2. सिंचाई व्यवस्था: ‘सुदर्शन झील’ (गिरनार, गुजरात)।

  3. व्यापार: सड़कों व बंदरगाहों का विकास; उत्तरापथदक्षिणापथ

  4. मुद्रा प्रणाली: पंच-चिह्नित सिक्के (Silver Punch-marked coins)।

  5. राजकीय उद्योग: धातुकर्म, वस्त्र, खनिज, शस्त्र निर्माण।


मौर्य समाज व संस्कृति

  • समाज: वर्ण व्यवस्था, परंतु सामाजिक गतिशीलता।

  • धर्म: बौद्ध, जैन, आजीवक, वैदिक धर्म सह-अस्तित्व में।

  • कला व स्थापत्य:

    • स्तंभ – सारनाथ, सांची, वैशाली।

    • शिल्प – यक्ष-यक्षिणी प्रतिमाएँ।

    • स्थापत्य – अशोक स्तंभ (सारनाथ सिंहमुख, राष्ट्रीय प्रतीक)।


मौर्य साम्राज्य का पतन

कारण

विवरण

उत्तराधिकार संघर्ष

अशोक के बाद कमजोर शासक

विशाल साम्राज्य का प्रशासनिक बोझ

नियंत्रण में कठिनाई

आर्थिक दबाव

कल्याणकारी नीति के कारण राजकोष खाली

बाहरी आक्रमण

यूनानी-शक आक्रमण

स्थानीय विद्रोह

प्रांतीय स्वायत्तता की माँग

अंततः पुष्यमित्र शुंग (185 ई.पू.) ने अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या कर
शुंग वंश की स्थापना की।


मौर्यकाल का ऐतिहासिक महत्त्व

  1. पहली बार सम्पूर्ण भारत की राजनीतिक एकता।

  2. प्रशासनिक संगठन की नींव (केंद्रीय-प्रांतीय व्यवस्था)।

  3. बौद्ध धर्म का अंतरराष्ट्रीय प्रसार।

  4. अर्थशास्त्र द्वारा शासन-विज्ञान का वैज्ञानिक प्रतिपादन।

  5. धम्म नीति द्वारा नैतिक शासन की परंपरा।


UPSC + IGNOU एकीकृत तालिका

IGNOU Unit

UPSC विषय

प्रमुख फोकस

Unit–7

नंद व मौर्य साम्राज्य

साम्राज्य निर्माण

GS Paper–1

Ancient India

Mauryan polity, economy

GS Paper–4

Ethics

अशोक की धम्म नीति

Art & Culture

Mauryan Art

स्तंभ, शिलालेख, स्थापत्य


संभावित प्रश्न (IGNOU + UPSC)

  1. नंद साम्राज्य के उत्कर्ष के कारणों की विवेचना कीजिए।

  2. चंद्रगुप्त मौर्य की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।

  3. अशोक की धम्म नीति के प्रमुख सिद्धांत और उसका प्रभाव बताइए।

  4. मौर्यकालीन प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं पर टिप्पणी कीजिए।

  5. मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों की समीक्षा कीजिए।


विश्लेषण (Analysis)

नंद और मौर्य युग भारत के इतिहास का सर्वाधिक संगठित राजनीतिक युग था।
इस काल में राज्य-शक्ति, धर्म और नैतिकता के समन्वय से शासन की नई अवधारणा विकसित हुई।
जहाँ नंदों ने आर्थिक और सैन्य शक्ति का आधार बनाया,
वहीं मौर्यों ने उसे राज्य-नीति और धर्म-नीति के संगम में परिवर्तित कर दिया।

अशोक ने पहली बार “राजनीति में नैतिकता” को स्थान दिया –
जो आज भी शासन की सर्वोत्तम अवधारणा मानी जाती है।


सारांश (Summary – 5 Points)

  1. नंद वंश ने केंद्रीकृत शासन और आर्थिक शक्ति की नींव रखी।

  2. चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत को पहली बार एकीकृत किया।

  3. अशोक ने धम्म नीति द्वारा शासन को नैतिक दिशा दी।

  4. मौर्यकाल प्रशासन, कला, और अर्थव्यवस्था के उत्कर्ष का युग था।

  5. अशोक के पश्चात साम्राज्य के पतन से भारत पुनः अनेक राज्यों में बँट गया।


निष्कर्ष (Conclusion)

नंद और मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास के स्वर्ण युग हैं।
इनके शासन में भारत ने न केवल राजनीतिक एकता बल्कि
नैतिक-सांस्कृतिक समरसता भी प्राप्त की।
अशोक का संदेश – “धम्मेन विजेति” (धर्म से विजय) –
आज भी शासन और समाज दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है।

BHIC-101: भारत का इतिहास – I (History of India – From Earliest Times to 300 CE)

नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आप इस पेपर की सभी यूनिट्स के विस्तृत नोट्स देख सकते हैं। प्रत्येक यूनिट को IGNOU और UPSC दोनों दृष्टियों से तैयार किया गया है।

 यूनिट-वार नोट्स:

1️. BHIC-101 Unit 1: भारत की प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ (Prehistoric Cultures of India)
2️. BHIC-101 Unit 2: धातु युगीन संस्कृतियाँ (Chalcolithic & Iron Age Cultures)

3. BHIC-101 Unit 3:सिंधु सभ्यता

4. BHIC-101 Unit 4: वैदिक सभ्यता

5. BHIC-101 Unit 5: लौह युग व राज्य निर्माण

6. BHIC-101 Unit 5A: 16 महाजनपद और गणराज्य

7. BHIC-101 Unit 6: धार्मिक आंदोलन – बौद्ध, जैन, आजीवक

8. BHIC-101 Unit 7: नंद व मौर्य साम्राज्य

9. BHIC-101 Unit 8: मौर्य प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था

10. BHIC-101 Unit 9: मौर्योत्तर भारत – शुंग, सातवाहन, कांबोज प्रभाव

11. BHIC-101 Unit 10: मौर्योत्तर काल से गुप्त युग तक की सांस्कृतिक निरंतरता


सभी नोट्स को UPSC और IGNOU दोनों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर सरल भाषा में तैयार किया गया है ताकि विद्यार्थी एक ही स्रोत से दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।


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