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प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) | UPSC/PCS तैयारी हेतु 3000+ शब्दों का विस्तृत नोट्स | Ancient History Complete Guide

 

प्रागैतिहासिक काल सम्पूर्ण Notes

प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) — UPSC/PCS हेतु विस्तृत लेख


Table of Contents

  1. प्रस्तावना

  2. प्रागैतिहासिक काल: परिभाषा और विशेषताएँ

  3. प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन के स्रोत

    • पुरातात्विक स्रोत

    • मानवशास्त्रीय स्रोत

    • जीवाश्म

    • रेडियोकार्बन डेटिंग

  4. प्रागैतिहासिक काल का वर्गीकरण

    • पाषाण युग
      a. पुरापाषाण
      b. मध्यपाषाण
      c. नवपाषाण

    • धातु युग
      a. ताम्रपाषाण
      b. कांस्य
      c. लौह

  5. भारत का पुरापाषाण काल

    • भौगोलिक विस्तार

    • प्रमुख स्थल

    • उपकरण

    • जीवन शैली

  6. भारत का मध्यपाषाण काल

    • प्रमुख स्थल

    • उपकरण

    • अर्थव्यवस्था

  7. भारत का नवपाषाण काल 

  8. ताम्रपाषाण युग

  9. लौह युग और भारत 

  10. प्रागैतिहासिक कला व गुफा चित्रकला 

  11. सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था 

  12. UPSC High-Yield Points 

  13. FAQs 

  14. MCQs 

  15. Sources 

  16. PDF Download


1. प्रस्तावना (Introduction)

प्रागैतिहासिक काल वह समय है, जब मनुष्य के पास लिखित अभिलेख नहीं थे।
यह वह कालखंड है जिसमें मानव ने:

  • प्रकृति के साथ संघर्ष किया,

  • जीवित रहने की तकनीकें विकसित कीं,

  • उपकरणों का आविष्कार किया,

  • भोजन संग्रह और उत्पादन के तरीकों को समझा,

  • गुफा चित्रों और स्थापत्य के प्रारंभिक रूप विकसित किए।

UPSC/PCS में प्रागैतिहासिक काल पर नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर:

  • पुरापाषाण स्थल

  • नवपाषाण संस्कृति

  • ताम्रपाषाण समाज

  • गुफा चित्रकला

  • सामाजिक-आर्थिक विशेषताएँ


2. प्रागैतिहासिक काल: परिभाषा और विशेषताएँ

“Prehistoric Period” वह समय है, जब:

  • कोई लिखित भाषा नहीं थी

  • पत्थरों के औजारों का प्रयोग व्यापक था

  • शिकार–संग्रह पर जीवन आधारित था

  • धीरे-धीरे कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन का विकास हुआ

प्रमुख विशेषताएँ:

  • मानव विकास की प्रारंभिक अवस्थाएँ

  • छोटे-छोटे समूहों में जीवन

  • प्रकृति पर उच्च निर्भरता

  • उपकरणों का क्रमिक विकास

  • कला का जन्म (गुफा चित्रों के माध्यम से)


3. प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन के स्रोत (Sources of Study)

प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन मुख्यतः वैज्ञानिक और पुरातात्विक तरीकों से होता है।


(a) पुरातात्विक स्रोत

  • पत्थर के उपकरण

  • गुफा चित्र

  • हड्डियाँ

  • बस्तियाँ

  • खाद्य अवशेष

  • अग्नि-कुण्ड

  • मिट्टी की वस्तुएँ


(b) मानवशास्त्रीय स्रोत

  • कंकाल

  • दाँतों की संरचना

  • देह की आकृति और आकार

  • विभिन्न प्रजातियों के विकास का अध्ययन


(c) जीवाश्म (Fossil Sources)

मानव विकास को समझने में जीवाश्म सबसे महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।


(d) वैज्ञानिक डेटिंग पद्धतियाँ

1. रेडियोकार्बन डेटिंग (C14)

  • 40,000 वर्ष तक के वस्तुओं की तिथि निर्धारण

2. थर्मोल्यूमिनेसेन्स

  • मृदभांड, अग्निकुण्ड

3. आर्गन-आर्गन डेटिंग

  • लाखों वर्षों पुराने ज्वालामुखीय स्तर


4. प्रागैतिहासिक काल का वर्गीकरण (Classification)

भारत सहित विश्व में प्रागैतिहासिक काल को सामान्यतः 3 बड़े भागों में विभाजित किया जाता है:


A. पाषाण युग (Stone Age)

इसमें तीन युग शामिल हैं:

  1. पुरापाषाण युग (Paleolithic Age)

  2. मध्यपाषाण युग (Mesolithic Age)

  3. नवपाषाण युग (Neolithic Age)


B. धातु युग (Metal Age)

इसके अंतर्गत आते हैं:

  1. ताम्रपाषाण (Chalcolithic)

  2. कांस्य (Bronze Age)

  3. लौह युग (Iron Age)


A. पाषाण युग (Stone Age)


5. भारत का पुरापाषाण काल (Indian Paleolithic Age)

भारत में पुरापाषाण काल लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है।


(a) भौगोलिक विस्तार

भारत में पुरापाषाण संस्कृति का विस्तार:

  • सोन नदी घाटी

  • नर्मदा घाटी

  • बिलासपुर

  • पुणे – भीमा घाटी

  • कर्नाटक – हुनसगी

  • कश्मीर

  • राजस्थान


(b) प्रमुख स्थल

  1. भीमबेटका (मध्य प्रदेश)
    → UNESCO World Heritage
    → गुफा चित्रों के लिए प्रसिद्ध
    → पुरापाषाण + मध्यपाषाण दोनों के साक्ष्य

  2. अत्तिरमपक्कम (तमिलनाडु)
    → सबसे प्राचीन होमो इरेक्टस गतिविधियाँ

  3. नर्मदा घाटी (मध्य प्रदेश)
    → नर्मदा मानव जीवाश्म (होमो इरेक्टस प्रकार)

  4. किब्बनहल्ली (कर्नाटक)

  5. दक्षिणी सोन घाटी


(c) उपकरण (Tools)

पुरापाषाण उपकरण तीन प्रकार के होते हैं:

1. निम्न पुरापाषाण

  • हैण्ड ऐक्स

  • क्लिवर

  • क्लीवर

  • चॉपर

2. मध्य पुरापाषाण

  • फ्लेक तकनीक

  • रेटूशिंग

3. उच्च पुरापाषाण

  • ब्लेड

  • बुरिन

  • स्क्रेपर


(d) जीवन शैली

  • खानाबदोश

  • शिकार और संग्रह

  • गुफाओं/शैलाश्रयों में निवास

  • आग का सीमित प्रयोग

  • भाषा का प्रारंभिक गठन


6. भारत का मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)

10,000–6000 ईसा पूर्व


(a) प्रमुख विशेषताएँ

  • जलवायु में सुधार

  • छोटे और तीखे उपकरण: Microliths

  • प्रारंभिक पशुपालन की शुरुआत

  • मृतकों के दफ़नाने की परंपरा


(b) प्रमुख स्थल

  1. बागोर (राजस्थान)
    → मानव-पशु सह-अस्तित्व
    → अग्नि उपयोग के प्रमाण

  2. आदमगढ़ (MP)

  3. भीमबेटका – मध्यकालीन कला

  4. सराई नाहर राय (UP)
    → सबसे पुरानी सामूहिक कब्रें


(c) अर्थव्यवस्था

  • शिकार-संग्रह

  • प्रारंभिक पशुपालन

  • कुछ स्थानों पर प्रारंभिक कृषि के प्रमाण


7. भारत का नवपाषाण काल (Neolithic Age in India)

6000 ईसा पूर्व – 2000 ईसा पूर्व

नवपाषाण युग मानव सभ्यता के विकास का वह चरण है, जब मनुष्य ने:

  • कृषि शुरू की

  • पशुपालन अपनाया

  • पहली बार स्थायी बस्तियाँ बसाईं

  • चमकाए हुए पत्थरों के औजार बनाए

  • मिट्टी के बर्तन बनाए

  • सामाजिक संगठन विकसित किया

इसे “मानव विकास का क्रांतिकारी चरण” माना जाता है।


(a) प्रमुख विशेषताएँ

  • कृषि का प्रारंभ

  • अनाज उत्पादन: गेहूँ, जौ, बाजरा

  • पशुपालन: गाय, भेड़, बकरी

  • चमकदार/पॉलिश किए हुए औजार

  • मिट्टी की वस्तुएँ

  • स्थायी घर (कच्ची-ईंटों के मकान)


(b) प्रमुख नवपाषाण स्थल

1. मेहरगढ़ (बलूचिस्तान)

→ भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पुराना कृषि-बस्ती स्थल
→ 7000 BCE
→ गेहूँ-बार्ली उगाए गए

2. गुफ़कराल (कश्मीर)

→ हाथकरघा, ऊन कताई

3. बुरज़ाहोम (कश्मीर)

→ गड्ढे वाले मकान
→ पालतू कुत्ते के साथ दफनाना

4. चिरंद (बिहार)

→ अनाज भंडारण
→ मवेशियों का पालन

5. पईंतल (दक्षिण भारत)

→ चमकाए हुए उपकरण

6. मास्की, तेकलकोटा (कर्नाटक)

→ दक्कन के नवपाषाण केंद्र


(c) उपकरण

  • कुल्हाड़ी

  • दराँती

  • पत्थर के चमकदार औजार

  • हड्डी के औजार

  • मृदभांड


(d) समाज

  • समुदाय आधारित

  • मातृवंशीय (कुछ क्षेत्रों में)

  • घरों का सामूहिक निर्माण

  • प्रारंभिक धर्म


8. ताम्रपाषाण युग (Chalcolithic Age)

3000 BCE – 1000 BCE

यह अवधि वह समय है जब:

  • पत्थर + ताँबे दोनों का उपयोग हुआ

  • कृषि और पशुपालन अत्यधिक विकसित हुए

  • व्यापार-व्यवस्था का उभार हुआ

  • ग्राम जीवन अस्तित्व में आया


(a) प्रमुख ताम्रपाषाण क्षेत्र

1. राजस्थान–गुजरात क्षेत्र

  • आहड़

  • गिलुंड

  • बालाथल

2. महाराष्ट्र–MP क्षेत्र

  • इनामगाँव

  • नेवासा

  • जोर्वे संस्कृति (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)

3. गंगा घाटी

  • मध्य गंगा–पश्चिम बिहार


(b) अर्थव्यवस्था

  • कृषि—गेहूँ, जौ, बाजरा

  • पशुपालन—भेड़, बकरी, गाय

  • ताँबे का उपयोग

  • मिट्टी के बर्तन—काली-लाल मृदभांड


(c) सामाजिक संरचना

  • गढ़ी हुई बस्तियाँ

  • सामूहिक कब्रगाह

  • असमानता—कुछ कब्रों में आभूषण व उपकरण


9. लौह युग और भारत में परिवर्तन (Iron Age in India)

1000 BCE – 600 BCE

भारत में लौह युग ने सामाजिक-आर्थिक जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किए।


(a) लोहे का प्रसार

  • उत्तर प्रदेश और बिहार: प्रारंभिक केंद्र

  • धान और दलहनों का विस्तार

  • भारी जंगल साफ़ हुए


(b) उत्तर भारत की संस्कृतियाँ

PGW (Painted Grey Ware) Culture

  • महाजनपदों का प्रारंभ

  • कुरु–पांचाल क्षेत्र

NBPW (Northern Black Polished Ware)

  • उन्नत कृषि

  • शहरीकरण

  • मौर्य काल का आधार


(c) दक्षिण भारत

  • मेगालिथिक संस्कृति

  • काली–लाल मृदभांड

  • दफनाने की परंपरा

  • लौह उपकरण

  • पशुपालन


10. प्रागैतिहासिक कला व गुफा चित्रकला (Prehistoric Art & Cave Paintings)

दुनिया की सबसे पुरानी कला परंपरा—भारतीय शैलचित्र—भारत को अद्वितीय स्थान प्रदान करती है।
सबसे महत्वपूर्ण स्थल है:


(a) भीमबेटका (UNESCO World Heritage)

यहाँ चित्रों में दर्शाए गए हैं:

  • नृत्य

  • शिकार

  • युद्ध

  • जन-जीवन

  • पशु—हिरण, गाय, हाथी, बाइसन

रंग:

  • लाल

  • सफेद

  • हरा

  • काला

तकनीक:

  • प्राकृतिक रंग (हिमालयी पत्थर, गेरू)

  • उंगलियों एवं ब्रश का प्रयोग


(b) अन्य चित्रस्थल

  • कर्नाटक

  • उत्तर प्रदेश

  • मध्य प्रदेश में 300+ शैलचित्र स्थल

  • छत्तीसगढ़ – चित्रकोट क्षेत्र


11. सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था (Socio-Economic Features)


(a) सामाजिक जीवन

  • छोटे समूह

  • समानता आधारित समाज

  • कोई जटिल वर्ग व्यवस्था नहीं

  • प्रारंभिक धर्म – प्रकृति पूजा


(b) आर्थिक जीवन

  • शिकार

  • संग्रह

  • पशुपालन

  • धीरे-धीरे कृषि

  • मिट्टी के बर्तन

  • पेड़-पौधों की जानकारी


(c) धार्मिक जीवन

  • सूर्य, चंद्र, जल, वृक्ष

  • मृतकों को दफनाना

  • पूर्वज पूजा


12. UPSC High-Yield Points

  • भारत का सबसे पुराना पुरापाषाण स्थल → अत्तिरमपक्कम

  • सबसे पुरानी कृषि → मेहरगढ़

  • मध्यपाषाण के प्रमुख स्थल → बागोर, भीमबेटका, सराय नाहर राय

  • नवपाषाण के प्रमुख स्थल → बुरज़ाहोम, गुफ़कराल

  • ताम्रपाषाण का महत्वपूर्ण केंद्र → जोर्वे संस्कृति

  • लौह युग → PGW, NBPW

  • सबसे बड़ी शैलचित्र परंपरा → भीमबेटका

  • लोहे का प्रारंभ → गंगा-घाटी


13. FAQs

Q1. प्रागैतिहासिक काल को “अलिखित इतिहास” क्यों कहा जाता है?

क्योंकि इस काल में लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे; केवल पुरातात्विक साक्ष्य हैं।


Q2. भारत का सबसे महत्वपूर्ण पुरापाषाण स्थल कौन-सा है?

भीमबेटका (MP) — UNESCO Heritage।


Q3. नवपाषाण काल में क्या मुख्य परिवर्तन हुआ?

कृषि, पशुपालन और स्थायी ग्राम जीवन की शुरुआत।


Q4. ताम्रपाषाण युग का केंद्र कहाँ था?

राजस्थान–गुजरात, MP–महाराष्ट्र क्षेत्र (Jorwe  culture)।


Q5. PGW और NBPW क्या हैं?

ये उत्तर भारतीय लौह युग की प्रमुख मृदभांड परंपराएँ हैं।


14. MCQs

1. भीमबेटका किसके लिए प्रसिद्ध है?

A. लौह उपकरण
B. गुफा चित्र
C. ताम्रपाषाण बस्तियाँ
D. सबसे पुरानी नदियाँ
उत्तर: B


2. मेहरगढ़ किसका प्रमुख स्थल है?

A. पुरापाषाण
B. नवपाषाण
C. ताम्रपाषाण
D. लौह युग
उत्तर: B


3. सराय नाहर राय किस युग से संबंधित है?

A. मध्यपाषाण
B. नवपाषाण
C. लोहे का युग
D. गुप्त काल
उत्तर: A


4. जोर्वे संस्कृति किस राज्य से प्रमुख रूप से जुड़ी है?

A. उत्तर प्रदेश
B. बिहार
C. महाराष्ट्र
D. तमिलनाडु
उत्तर: C


15. Sources

  • Bridget Allchin – The Rise of Civilization in India and Pakistan

  • D.K. Bhattacharya – Anthropology

  • Romila Thapar – Early India

  • ASI Excavation Reports

  • NCERT – Ancient India


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