IGNOU BHIC-101 Unit 6 Notes in Hindi: यह यूनिट धार्मिक आंदोलन और बौद्ध तथा जैन धर्म के उदय (Religious Movements: Rise of Buddhism and Jainism) पर आधारित है, जो IGNOU B.A. History (Hons.) के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस यूनिट में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक परिदृश्य का अध्ययन किया गया है, जिसमें वैदिक कर्मकांडों की जटिलता और उनके विरुद्ध उठे सुधार आंदोलनों को प्रमुखता से समझाया गया है।
इस खंड में महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध के जीवन, सिद्धांतों और शिक्षाओं की विवेचना की गई है। साथ ही, श्रावक-संघ व्यवस्था, संघठन, अहिंसा, मध्यम मार्ग, तथा त्रिरत्न और अष्टांगिक मार्ग जैसी शिक्षाओं के माध्यम से इन धर्मों के मूलभूत सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। यह यूनिट यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार बौद्ध और जैन धर्म ने भारतीय समाज में समता, नैतिकता और सामाजिक सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।
यह सामग्री न केवल IGNOU छात्रों के लिए बल्कि UPSC, SSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। इन नोट्स को IGNOU Syllabus और UPSC History syllabus दोनों के अनुरूप तैयार किया गया है ताकि विद्यार्थी छठी शताब्दी ईसा पूर्व के धार्मिक पुनर्जागरण और उसके प्रभाव को गहराई से समझ सकें।
नीचे दिए गए नोट्स में विषयवार संक्षिप्त व्याख्या, प्रमुख तथ्य, तथा परीक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक बिंदु दिए गए हैं — जो आपके IGNOU Assignments और UPSC Prelims–Mains दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होंगे।
BHIC-101 | Unit–6 – धार्मिक आंदोलन : बौद्ध और जैन धर्म का उदय
परिचय (Introduction)
छठी शताब्दी ई.पू. का भारत सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा था।
वैदिक धर्म जटिल यज्ञों, कर्मकांडों और ब्राह्मण प्रभुत्व के कारण जनसाधारण से दूर हो चुका था।
इस पृष्ठभूमि में दो महान धार्मिक आंदोलन जन्म लेते हैं —
👉 बौद्ध धर्म (Buddhism)
👉 जैन धर्म (Jainism)
इन दोनों ने भारत में सादगी, नैतिकता और अहिंसा पर आधारित जीवन-दर्शन प्रस्तुत किया।
धार्मिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि
👉 इन परिस्थितियों ने “श्रवण–मनन–सत्याचार” आधारित वैकल्पिक धर्मों को जन्म दिया।
बौद्ध धर्म (Buddhism)
(A) संस्थापक:
गौतम बुद्ध (563–483 ई.पू.)
जन्म: लुंबिनी (शाक्य कुल, कपिलवस्तु)
पिता: शुद्धोधन | माता: माया देवी
ज्ञानप्राप्ति: बोधगया (उरुवेला, बोधि वृक्ष के नीचे)
प्रथम उपदेश: सारनाथ (धम्मचक्र-प्रवर्तन)
निधन: कुशीनगर (महापरिनिर्वाण)
(B) मूल शिक्षाएँ
चार आर्य सत्य (Four Noble Truths):
दुःख है।
दुःख का कारण तृष्णा है।
दुःख की निवृत्ति संभव है।
दुःख निवृत्ति का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path):
सम्यक दृष्टि
सम्यक संकल्प
सम्यक वचन
सम्यक कर्म
सम्यक आजीविका
सम्यक प्रयास
सम्यक स्मृति
सम्यक समाधि
अन्य प्रमुख सिद्धांत:
मध्यम मार्ग – अति त्याग या भोग से परे मध्यम जीवन।
अनात्मवाद – आत्मा जैसी कोई स्थायी सत्ता नहीं।
कर्म और पुनर्जन्म – कर्मानुसार अगले जीवन का निर्धारण।
अहिंसा और करुणा – बौद्ध जीवन का आधार।
(C) संघ और संघटन
संघ: बौद्ध भिक्षुओं का संगठन।
उद्देश्य: धर्म का प्रचार और अनुशासित जीवन।
तीर्थ: बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, राजगृह।
संघटन: बुद्ध के पश्चात चार बौद्ध संघ परिषदें (Council)।
प्रमुख परिषदें (Buddhist Councils)
(D) बौद्ध संप्रदाय
(E) बौद्ध धर्म का प्रभाव
सामाजिक समानता की भावना।
अहिंसा और करुणा का प्रसार।
शिल्प, मूर्तिकला, स्थापत्य और कला पर प्रभाव।
विदेशों में प्रचार – श्रीलंका, चीन, जापान, नेपाल, म्यांमार।
जैन धर्म (Jainism)
(A) संस्थापक:
महावीर स्वामी (599–527 ई.पू.)
24वें तीर्थंकर।
जन्म: कुंडग्राम (वैशाली) – क्षत्रिय कुल।
पिता: सिद्धार्थ | माता: त्रिशला।
30 वर्ष की आयु में संन्यास;
12 वर्ष तपस्या के बाद ज्ञानप्राप्ति (कैवल्य) – ऋजुपालिका नदी तट (बिहार)।
उपदेश: अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य।
(B) प्रमुख सिद्धांत
पंच महाव्रत (Five Great Vows):
अहिंसा
सत्य
अस्तेय (चोरी न करना)
ब्रह्मचर्य
अपरिग्रह
अन्य विचार:
अनेकांतवाद: सत्य के अनेक पहलू हो सकते हैं।
स्यादवाद: सापेक्ष सत्य की अवधारणा।
जीव-अजीव सिद्धांत: आत्मा (जीव) और पदार्थ (अजीव) की भिन्नता।
कर्म-सिद्धांत: कर्म ही बंधन और मुक्ति का कारण है।
(C) संघ और संप्रदाय
महावीर के अनुयायियों ने दो प्रमुख संप्रदाय बनाए:
1. श्वेताम्बर (सफेद वस्त्रधारी) – साधारण जीवन, गुजरात–राजस्थान।
2. दिगंबर (नग्न साधु) – कठोर तप, दक्षिण भारत।
(D) जैन धर्म का प्रभाव
अहिंसा की परंपरा भारतीय समाज में स्थापित हुई।
तपस्या और संयम का आदर्श।
प्राकृत भाषा के उपयोग से जनसाधारण तक धर्म का प्रसार।
स्थापत्य कला (गिरनार, शत्रुंजय, एलोरा) में अमर छाप।
बौद्ध और जैन धर्म की समानताएँ व भिन्नताएँ
धार्मिक आंदोलनों का ऐतिहासिक महत्त्व
वैदिक धर्म के विकल्प के रूप में नई नैतिक चेतना का उदय।
लोकभाषाओं का प्रयोग – धर्म को जनसुलभ बनाना।
सामाजिक समानता और जातिविहीनता की भावना।
अहिंसा और करुणा को भारतीय संस्कृति का आधार बनाना।
राजनीतिक प्रभाव: मौर्य शासक अशोक ने बौद्ध धर्म को राजधर्म बनाया।
UPSC + IGNOU एकीकृत तालिका
संभावित प्रश्न (IGNOU + UPSC)
बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग की व्याख्या कीजिए।
जैन धर्म के अनेकांतवाद और पंच महाव्रतों की विवेचना कीजिए।
छठी शताब्दी ई.पू. के धार्मिक आंदोलनों के उद्भव के कारण बताइए।
बौद्ध और जैन धर्म के समानताओं व भिन्नताओं की समीक्षा कीजिए।
विश्लेषण (Analysis)
छठी शताब्दी ई.पू. के धार्मिक आंदोलन भारतीय इतिहास की नैतिक क्रांति थे।
इन आंदोलनों ने धर्म को कर्मकांड से निकालकर आचरण और नैतिकता पर केंद्रित किया।
बुद्ध और महावीर दोनों ने अहिंसा, सत्य और संयम पर आधारित समाज की कल्पना की।
ये आंदोलन भारतीय संस्कृति के उस मानवीय स्वरूप को जन्म देते हैं
जिसमें सहिष्णुता, करुणा और सत्य सर्वोपरि मूल्य बन गए।
सारांश (Summary – 5 Points)
छठी शताब्दी ई.पू. में बौद्ध और जैन धर्म सामाजिक-धार्मिक प्रतिक्रिया के रूप में उभरे।
दोनों ने कर्म, अहिंसा और समानता का संदेश दिया।
बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग पर आधारित था, जैन धर्म कठोर तप पर।
लोकभाषाओं के प्रयोग से ये धर्म जनसुलभ बने।
इन आंदोलनों ने भारतीय संस्कृति में नैतिकता और सहिष्णुता की परंपरा स्थापित की।
निष्कर्ष (Conclusion)
बौद्ध और जैन धर्म भारत के इतिहास की आध्यात्मिक क्रांति के प्रतीक हैं।
इन आंदोलनों ने मानव जीवन को अनुष्ठान से निकालकर
नैतिकता, करुणा और संयम की ओर अग्रसर किया।
आज भी भारतीय संस्कृति की आत्मा में
अहिंसा, सत्य और मध्यम मार्ग के सिद्धांत विद्यमान हैं —
जो इन्हीं आंदोलनों की शाश्वत देन है।
BHIC-101: भारत का इतिहास – I (History of India – From Earliest Times to 300 CE)
नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आप इस पेपर की सभी यूनिट्स के विस्तृत नोट्स देख सकते हैं। प्रत्येक यूनिट को IGNOU और UPSC दोनों दृष्टियों से तैयार किया गया है।
यूनिट-वार नोट्स:
1️. BHIC-101 Unit 1: भारत की प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ (Prehistoric Cultures of India)
2️. BHIC-101 Unit 2: धातु युगीन संस्कृतियाँ (Chalcolithic & Iron Age Cultures)
3. BHIC-101 Unit 3:सिंधु सभ्यता
4. BHIC-101 Unit 4: वैदिक सभ्यता
5. BHIC-101 Unit 5: लौह युग व राज्य निर्माण
6. BHIC-101 Unit 5A: 16 महाजनपद और गणराज्य
7. BHIC-101 Unit 6: धार्मिक आंदोलन – बौद्ध, जैन, आजीवक
8. BHIC-101 Unit 7: नंद व मौर्य साम्राज्य
9. BHIC-101 Unit 8: मौर्य प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था
10. BHIC-101 Unit 9: मौर्योत्तर भारत – शुंग, सातवाहन, कांबोज प्रभाव
11. BHIC-101 Unit 10: मौर्योत्तर काल से गुप्त युग तक की सांस्कृतिक निरंतरता
सभी नोट्स को UPSC और IGNOU दोनों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर सरल भाषा में तैयार किया गया है ताकि विद्यार्थी एक ही स्रोत से दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
2️. BHIC-101 Unit 2: धातु युगीन संस्कृतियाँ (Chalcolithic & Iron Age Cultures)
