दक्षिण भारत – संगम युग एवं दक्षिण भारतीय राजवंश: चोल, पांड्य, चेरा, चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव—कला व स्थापत्य
UPSC/PCS के लिए विस्तृत विश्लेषणात्मक लेख
Table of Contents
प्रस्तावना
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स्रोत
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संगम साहित्य
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तमिल ब्राह्मी अभिलेख
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पुरातात्विक स्रोत
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विदेशी यात्रियों के विवरण
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संगम युग: समय, प्रकृति और राजनीतिक संरचना
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प्रमुख संगम राजवंश
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चोल
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पांड्य
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चेरा
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चोल राजवंश (आद्य चोल वंश – संगम चोल)
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शासन
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प्रशासन
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समाज
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अर्थव्यवस्था
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पांड्य राजवंश
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राजनीतिक इतिहास
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प्रशासन
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संस्कृति
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चेरा राजवंश
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प्रमुख राजा
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व्यापार
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साहित्य
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दक्षिण भारत में गुप्तोत्तर काल का संक्रमण
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चालुक्य साम्राज्य
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पल्लव साम्राज्य
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राष्ट्रकूट साम्राज्य
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दक्षिण भारतीय कला और स्थापत्य
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दक्षिण भारतीय समाज व अर्थव्यवस्था
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UPSC High-Yield Points
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FAQs
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MCQs
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Sources
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1. प्रस्तावना (Introduction)
दक्षिण भारत का संगम युग (Sangam Age) भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और साहित्यिक अवधियों में से एक है।
यह समय—राजनीतिक शक्ति, व्यापारिक विस्तार, समुद्री संपर्क, साहित्यिक उत्कर्ष, और कला-स्थापत्य के विकास—का स्वर्ण काल माना जाता है।
चोल, पांड्य, चेरा—ये तीन प्रमुख तमिल राजवंश संगम युग के केंद्र में रहे।
इसके बाद दक्षिण भारत में पल्लव, चालुक्य, राष्ट्रकूट का उदय हुआ, जिन्होंने भारतीय कला, मंदिर वास्तुकला और व्यापार को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
UPSC/PCS के लिए यह विषय इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
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Ancient + Early Medieval India का प्रमुख अध्याय है
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कला एवं संस्कृति सेक्शन में 3–5 प्रश्न यहीं से आते हैं
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संगम साहित्य और दक्षिण भारतीय शिल्प पर विशेष प्रश्न पूछे जाते हैं
2. स्रोत (Sources of Sangam Age)
संगम युग के अध्ययन के लिए चार मुख्य प्रकार के स्रोत उपलब्ध हैं:
(a) संगम साहित्य (Sangam Literature)
यह दक्षिण भारत की सबसे प्राचीन साहित्यिक परंपरा है।
प्रमुख ग्रंथ:
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एट्टुतोक्कै (Eight Anthologies)
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पट्टुप्पाट्टु (Ten Idylls)
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तोल्काप्पियम – तमिल व्याकरण का महत्वपूर्ण ग्रंथ
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पथुप्पट्टु
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इरैपाट्टु
विषयवस्तु:
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युद्ध
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प्रेम
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समाज
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संस्कृति
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राजा–प्रजा संबंध
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व्यापार
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समुद्री संपर्क
(b) तमिल-ब्राह्मी अभिलेख
तीसरी सदी ईसा पूर्व से प्रारंभ।
मुख्य स्थल:
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अरणमुलै
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अडिचनल्लूर
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मदुरै
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कारिकला चोल के शिलालेख
(c) पुरातात्विक स्रोत
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कीज़ड़ी (Kezhadi) उत्खनन
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कावेरी डेल्टा
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अडिचनल्लूर कब्र
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पत्तनम (मोज़िरिस – रोमन व्यापार केंद्र)
(d) विदेशी यात्रियों के विवरण
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प्लिनी – रोम–तमिल व्यापार
पटोलमी – तमिल बंदरगाह
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पेरिप्लस – यवन व्यापार का विवरण
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अलेक्ज़ांडरियाई दस्तावेज़
3. संगम युग: समय, प्रकृति और राजनीतिक संरचना
काल निर्धारण:
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सामान्यतः 300 ईसा पूर्व – 300 ईस्वी
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संगम अवसान: तीसरी सदी ईस्वी
(a) राजनीतिक संरचना
संगम युग तीन मुख्य राजवंशों में विभाजित था:
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चोल
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पांड्य
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चेरा
ये सभी समुद्री व्यापार और कृषि पर आधारित शक्तिशाली राजनीतिक केंद्र थे।
(b) स्थानीय प्रशासन
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“नाडु” – ग्रामीण इकाई
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“कुर्रम” – राजनीतिक संगठन
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“उर” – ग्राम सभा
4. प्रमुख संगम राजवंश (Major Sangam Dynasties)
अब हम तीनों संगम राजवंशों को UPSC के दृष्टिकोण से विस्तार से समझेंगे।
5. चोल राजवंश (Adya/Sangam Cholas)
चोलों का मूल क्षेत्र → कावेरी नदी घाटी
राजधानी → उरैयूर (बाद में पाटन – कांचीपुरम)
(a) प्रमुख संगम चोल शासक
1. करिकाला चोल
सबसे महान संगम चोल राजा।
उपलब्धियाँ:
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कावेरी बाँध का निर्माण (Kallanai Dam – आज भी उपयोग में)
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उरैयूर और पुहार का विकास
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नौसैनिक शक्ति
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व्यापारिक उन्नति
(b) प्रशासन
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राजा सर्वोच्च
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मंत्रिपरिषद
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सेना (पैदल + हाथी + घुड़सवार)
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नौसेना का विकास
(c) अर्थव्यवस्था
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कृषि, विशेषकर धान
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कपास व्यापार
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समुद्री व्यापार—रोमन साम्राज्य तक
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बंदरगाह: पुहार (Kaveripattinam)
(d) समाज
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मातृवंशीय परंपराओं का प्रभाव
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समाज विविध परंतु समानता आधारित
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वीरगाथाओं का महत्व
6. पांड्य राजवंश (Pandya Dynasty)
राजधानी – मदुरै
पांड्यों का उल्लेख अर्थशास्त्र में भी मिलता है।
(a) प्रमुख शासक
1. नेडुनेजेलियन
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संगम युद्धों के नायक
2. नेडुनजेलियन (Nedunjeliyan I)
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“तलैयालनकान पांड्य” – यवन व्यापार का विकास
(b) प्रशासन
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राजा
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मंत्री
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पूरानार – साहित्यिक मंत्री
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सेना: अश्वारोही, हाथी, पैदल
(c) अर्थव्यवस्था
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मोती-व्यापार
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हाथीदाँत
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काली मिर्च
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रोमन व्यापार
(d) संस्कृति
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तमिल अकादमियाँ
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संगम कवि
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देवपूजा (मुरुगन, काली, शिव)
7. चेरा राजवंश (Chera Dynasty)
चेरा राज्य आज के केरल और पश्चिमी तमिलनाडु में फैला था।
राजधानी – वान्जी / करूर
(a) प्रमुख राजा
1. उदियान चेरलाथन
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संगम साहित्य में महान राजा
2. सेनगुट्टुवन (Red Chera)
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कन्याकुमारी तक विस्तार
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“पत्तित्रुप्पट्टु” में वर्णित
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रोमन व्यापार का विस्तार
(b) अर्थव्यवस्था
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काली मिर्च
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नारियल
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मसाले
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रोमन समुद्री व्यापार (कट्टिवली मार्ग)
(c) साहित्य
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चेराओं के 3 कवि मंदिरों का उल्लेख
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पत्तुप्पाट्टु और एट्टुथोक्कै संग्रह में चेरा राजाओं का वर्णन
8. दक्षिण भारत में गुप्तोत्तर काल का संक्रमण (Transition after Sangam Age)
संगम युग के पतन के बाद दक्षिण भारत में गुप्त काल जैसा राजनीतिक केंद्रीकरण नहीं था।
लेकिन इसके स्थान पर क्षेत्रीय शक्तियाँ मज़बूत होकर उभरीं:
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चालुक्य (बादामी/वातापी)
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पल्लव (कांची/महाबलीपुरम)
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राष्ट्रकूट (मन्यखेट)
इन राजवंशों ने दक्षिण भारत की राजनीति, समुद्री व्यापार, मंदिर वास्तुकला और कला को स्वर्ण युग तक पहुँचाया।
9. चालुक्य साम्राज्य (Chalukyas)
(UPSC में कई प्रश्न चालुक्य-पल्लव युद्ध, वातापी, अइहोल मंदिर, तथा रावण फाढ़ चित्र पर आते हैं)
(a) चालुक्य वंश की शाखाएँ
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बादामी चालुक्य (Vatapi/Badami) – सबसे प्रख्यात
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कालयानी चालुक्य
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विमलादित्य चालुक्य
यहाँ हम बादामी चालुक्यों पर केंद्रित रहेंगे।
(b) संस्थापक – पुलकेशिन प्रथम (543 ई.)
राजधानी—वातापी (आधुनिक बादामी)
उन्होंने कर्नाटक के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों को एकीकृत किया।
(c) पुलकेशिन द्वितीय (610–642 ई.) – सबसे महान शासक
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अइहोल अभिलेख (कवि रविकीरति)
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हर्षवर्धन को नर्मदा पर रोका
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पल्लवों से संघर्ष
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अरबों के विरुद्ध विजय
उपलब्धियाँ
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दक्षिण भारत का शक्तिशाली महासाम्राज्य
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कन्नड़ प्रशासन की नींव
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व्यापारिक मार्गों का विकास
(d) चालुक्य कला और स्थापत्य
(यह विस्तृत विवरण Section 12 में दिया गया है)
10. पल्लव साम्राज्य (Pallavas)
(UPSC के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण – महाबलीपुरम, रथ मंदिर, कैलाशनाथ मंदिर आदि)
(a) राजधानी – कांचीपुरम
(b) प्रमुख पल्लव शासक
1. महेंद्रवर्मन प्रथम (600–630 ई.)
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गुफा-मंदिरों का निर्माण
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“बागो गुफा”
2. नरसिंहवर्मन प्रथम (630–668 ई.)
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पल्लव–चालुक्य संघर्ष
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पुलकेशिन द्वितीय को हराया
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महाबलीपुरम में रथ मंदिरों की शुरुआत
3. नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह)
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कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण
(c) पल्लव संस्कृति
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संस्कृत एवं तमिल का विकास
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बौद्ध और जैन प्रभाव
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नृत्य-कला का उत्कर्ष
11. राष्ट्रकूट साम्राज्य (Rashtrakutas)
(कला और वास्तुकला के golden period के लिए प्रसिद्ध)
(a) संस्थापक – दंति दुर्ग
(b) गोविन्द III और अमोघवर्ष I
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दक्षिण भारत, मध्य भारत और उत्तरी राज्यों पर प्रभाव
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अमोघवर्ष—कविराजमार्ग के रचयिता
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जैन धर्म का संरक्षण
(c) राष्ट्रकूट–प्रत्यिहार–पाल त्रिदलीय संघर्ष
यह उत्तर भारत के “कन्नौज त्रिपक्षीय संघर्ष” से समानांतर चलता रहा।
(d) राष्ट्रकूट कला
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एलोरा की कैलाश मंदिर (कैलासनाथ)—विश्व की सबसे बड़ी चट्टान-नक्काशी संरचना
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जैन गुफाएँ
12. दक्षिण भारतीय कला और स्थापत्य (South Indian Art & Architecture)
(इस सेक्शन में UPSC के लिए उच्चतम महत्व के विषय शामिल हैं)
(a) द्रविड़ शैली (Dravidian Style)
दक्षिण भारतीय कला की प्रमुख विशेषताएँ:
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ऊँचे गोपुरम
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गर्भगृह + मंडप
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विमान (शिखर)
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विशाल प्रांगण
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पत्थर-निर्मित मूर्तिकला
(b) संगम युग की कला
संगम युग में मंदिर निर्माण की शुरुआत तो हुई, लेकिन भव्यता नहीं थी।
मुख्य विशेषताएँ:
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लकड़ी, ईंट और पत्थरों का सीमित प्रयोग
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स्थानीय देवताओं का पूजन
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नृत्य, संगीत, युद्ध, प्रकृति का वर्णन
(c) पल्लव कला और स्थापत्य
यह दक्षिण भारतीय मंदिर कला का स्वर्ण युग है।
1. महाबलीपुरम (ममल्लपुरम)
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नरसिंहवर्मन I द्वारा विकसित
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Rath Temples (Pancha Rathas) – एकलाशिल्प
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Descent of the Ganga / Arjuna’s Penance – विशाल शैल-चित्र
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Mahishasuramardini गुफा
2. कैलाशनाथ मंदिर (कांचीपुरम)
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राजसिंह (नरसिंहवर्मन II) द्वारा निर्मित
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द्रविड़ मंदिर वास्तुकला का प्राचीनतम उत्कृष्ट उदाहरण
(d) चालुक्य कला और स्थापत्य
1. बादामी गुफा मंदिर
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चट्टानों से काटकर बने
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विष्णु, शिव, जैन तीर्थंकर
2. अइहोल – मंदिरों की प्रयोगशाला
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दक्षिण भारतीय मंदिरों की “Architectural Laboratory”
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द्रविड़ + नागर + वेसर शैली
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दुर्गा मंदिर (Aihole) – घोड़े की नाल आकार का अप्सिडल मंदिर
3. पट्टडक्कल मंदिरसमूह
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UNESCO World Heritage Site
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द्रविड़ और नागर शैली का संगम
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विरुपाक्ष मंदिर (लोकेमहादेवी द्वारा निर्मित)
(e) राष्ट्रकूट कला
एलोरा – कैलाश मंदिर
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एक ही पहाड़ को तराशकर बनाया गया
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द्रविड़ शैली की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति
(f) चोल कला (Imperial Cholas – Later Period, but important for continuity)
हालाँकि संगम चोल प्रारंभिक थे, परंतु कला के क्षेत्र में मध्यकालीन चोल ने अद्भुत उन्नति की।
विशेषताएँ:
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ब्रॉन्ज मूर्तियाँ – नटराज
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तंजावुर – बृहदेश्वर मंदिर (राजराज चोल)
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नौसेन्य विस्तार
(यह सेक्शन लेख की ऐतिहासिक continuity बनाए रखने हेतु शामिल है; UPSC में अत्यंत पूछा जाता है।)
13. दक्षिण भारतीय समाज व अर्थव्यवस्था (Social & Economic Life)
(a) समाज
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मातृवंशीय प्रभाव
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कुटुम्ब प्रणाली
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वीरकाव्य परंपरा
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युद्ध-कला का महत्व
(b) अर्थव्यवस्था
संगम–उत्तर संगम काल में अर्थव्यवस्था का आधार:
कृषि:
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धान
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दालें
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नारियल
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काली मिर्च
व्यापार:
दक्षिण भारत विश्व का सबसे शक्तिशाली समुद्री व्यापार केंद्र बना:
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रोमन साम्राज्य
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दक्षिण-पूर्व एशिया
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श्रीलंका
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अरब व्यापारी
मोज़िरिस (केरल) और कावेरीपट्टिनम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह थे।
14. UPSC High-Yield Points
✔ संगम साहित्य – एट्टुतोक्कै, पत्तुप्पाट्टु
✔ करिकाला चोल – कावेरी बाँध
✔ चेरा – बोमार (pepper trade)
✔ पांड्य – मोती व्यापार
✔ पुलकेशिन द्वितीय – अइहोल प्रशस्ति
✔ नरसिंहवर्मन I – महाबलीपुरम
✔ कैलाशनाथ (कांची) – पल्लव
✔ कैलाश (एलोरा) – राष्ट्रकूट
✔ अइहोल – वास्तुकला प्रयोगशाला
✔ पट्टडक्कल – UNESCO स्थल
15. FAQs
Q1. संगम युग का प्रमुख आधार क्या था?
साहित्य, समुद्री व्यापार और तीन प्रमुख तमिल राजवंश—चोल, चेरा, पांड्य का शासन।
Q2. महाबलीपुरम किसने बनवाया?
नरसिंहवर्मन प्रथम (पल्लव वंश) ने।
Q3. कैलाश मंदिर किसने बनवाया?
राष्ट्रकूट शासक कृष्ण I ने।
Q4. चोलों की मुख्य पहचान क्या है?
कावेरी डेल्टा, नौसेना, ब्रॉन्ज मूर्तियाँ और बृहदेश्वर मंदिर।
16. MCQs
1. अइहोल किस वंश से संबंधित है?
A. चोल
B. पल्लव
C. चालुक्य
D. राष्ट्रकूट
उत्तर: C
2. पंच रथ कहाँ स्थित हैं?
A. कांचीपुरम
B. पट्टडक्कल
C. महाबलीपुरम
D. बादामी
उत्तर: C
3. करिकाला चोल किस उपलब्धि के लिए प्रसिद्ध है?
A. महाबलीपुरम
B. कावेरी बाँध
C. कैलाश मंदिर
D. मोती व्यापार
उत्तर: B
4. एलोरा का कैलाश मंदिर किसने बनवाया?
A. राजराज चोल
B. कृष्ण I
C. पुलकेशिन द्वितीय
D. महेंद्रवर्मन
उत्तर: B
17. Sources
-
K.A. Nilkanta Sastri – A History of South India
-
Romila Thapar – Early India
-
Upinder Singh – Ancient and Early Medieval India
-
A.L. Basham – The Wonder That Was India
-
Archaeological Survey of India (ASI Reports)
