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उत्तर–मौर्य काल (Post-Mauryan Age): शुंग–कान्व–सातवाहन, इंडो-ग्रीक, शक–कुषाण, राजनीतिक परिवर्तन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान | UPSC/PCS हेतु विस्तृत विश्लेषण

 

उत्तर–मौर्य काल – सम्पूर्ण Notes

उत्तर–मौर्य काल (Post-Mauryan Age): राजनीतिक परिवर्तनों से सांस्कृतिक पुनरुत्थान तक | UPSC/PCS के लिए विश्लेषणात्मक लेख


Table of Contents

  1. प्रस्तावना

  2. मौर्य साम्राज्य का पतन: कारण

  3. उत्तर–मौर्य काल का काल-विभाजन

  4. राजनीतिक इतिहास

    • शुंग वंश

    • काण्व वंश

    • इंडो-ग्रीक

    • शकों का आगमन

    • पार्थियन (Indo-Parthians)

    • कुषाण साम्राज्य

    • सातवाहन साम्राज्य

  5. प्रशासनिक संरचना

  6. आर्थिक परिवर्तन और वाणिज्य

  7. सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश

  8. बौद्ध एवं जैन धर्म का पुनरुत्थान

  9. कला, वास्तुकला और मूर्तिकला

  10. सिक्कों का इतिहास

  11. व्यापार मार्ग

  12. शिक्षा और साहित्य

  13. उत्तर–मौर्य काल की विशेषताएँ

  14. UPSC/PCS के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  15. FAQs

  16. MCQs with Answers

  17. स्रोत

  18. PDF Download


1. प्रस्तावना (Introduction)

उत्तर–मौर्य काल (Post-Mauryan Age) भारतीय इतिहास का वह कालखंड है, जो मौर्य साम्राज्य के पतन (185 ईसा पूर्व) के बाद आरंभ होता है और लगभग 300 वर्षों तक भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का साक्षी बनता है।

यह वह समय था जब:

  • स्थानीय राजवंशों का उत्थान हुआ,

  • विदेशी शक्तियाँ भारत में स्थापित हुईं,

  • व्यापार–वाणिज्य ने अपूर्व विकास किया,

  • बौद्ध–जैन धर्म का पुनरुत्थान हुआ,

  • भारतीय कला, मूर्तिकला व वास्तुकला ने वैश्विक मानकों को प्राप्त किया।


2. मौर्य साम्राज्य का पतन: कारण

मौर्य साम्राज्य के अंत के प्रमुख कारण निम्न थे:

(a) अशोक के बाद कमजोर उत्तराधिकारी

अशोक के बाद के शासक—विशेषकर दशरथ मौर्य—इतने सक्षम नहीं थे।

(b) प्रशासन का अत्यधिक केंद्रीकरण

केंद्र की शक्ति के कमजोर होने पर प्रदेशों ने विरोध शुरू किया।

(c) आर्थिक संकट

अत्यधिक सड़क निर्माण, प्रशासनिक विस्तार और धर्म नीति में खर्च से राजकोष पर दबाव बढ़ा।

(d) सैन्य कमजोरी

अशोक के पश्चात सेना पर व्यय कम हुआ, जिससे सीमाएँ असुरक्षित हुईं।

(e) ब्राह्मण–बौद्ध तनाव

ब्राह्मणों ने शुंगों का समर्थन किया और मौर्यों का विरोध बढ़ा।


3. उत्तर–मौर्य काल का काल-विभाजन

विद्वानों के अनुसार:

(a) भारतीय राजवंशों का युग (185–75 ईसा पूर्व)

  • शुंग

  • काण्व

(b) विदेशी राजाओं का युग (180 ईसा पूर्व–100 ईस्वी)

  • इंडो-ग्रीक

  • शक

  • पार्थियन

(c) महान साम्राज्यों का युग (100–300 ईस्वी)

  • कुषाण

  • सातवाहन


4. राजनीतिक इतिहास (Political Developments)

नीचे उत्तर–मौर्य भारत के प्रमुख राजवंशों/शक्तियों का क्रम है।


शुंग वंश (Shunga Dynasty) (185–75 BCE)

स्थापक: पुष्यमित्र शुंग

  • अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या

  • ब्राह्मण परंपरा का पुनर्जीवन

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • अश्वमेध यज्ञ का पुनः आयोजन

  • बौद्ध धर्म के प्रति कड़ाई (कुछ संदर्भों में)

  • कला का उत्थान: भरहुत स्तूप का निर्माण

अगले शासक

  • अग्निमित्र (कालिदास के नाटक—मालविकाग्निमित्रम—का नायक)


काण्व वंश (Kanva Dynasty) (75–30 BCE)

स्थापक: वसु देव काण्व

  • शुंग सत्ता को समाप्त किया

  • दक्षिण भारत में प्रभाव

विशेषताएँ:

  • संक्षिप्त शासन

  • ब्राह्मण परंपराओं का पुनरुत्थान


इंडो-ग्रीक (Indo-Greeks) (180 BCE–10 CE)

अश्वक जातियों और शक आक्रमणों से प्रेरित ग्रीक जनजातियाँ भारत में आईं।

सबसे प्रसिद्ध शासक:

  • मेनांडर (मिलिंद)
    → नागसेन के साथ संवाद मिलिंदपन्हा प्रसिद्ध
    → बौद्ध धर्म का संरक्षक

विशेषताएँ:

  • यवन सिक्कों पर युग्म लेख (ग्रीक-खरोष्ठी)

  • यथार्थवादी मूर्तिकला


शक (Scythians/Shakas) (90 BCE–100 CE)

प्रमुख शासक:

  • मौस

  • आज़ेस

  • रुद्रदामन I

रुद्रदामन I का महत्व:

  • जूनागढ़ अभिलेख (संस्कृत में पहला विस्तृत शिलालेख)

  • सुधंशन झील के बांध का पुनर्निर्माण


पार्थियन (Indo-Parthians)

सबसे प्रमुख शासक—गोंडोफर्नस

  • संत थॉमस से संबंधित परंपरा

  • व्यापार में उन्नति


कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire) (100–300 CE)

उत्तर–मौर्य काल की सबसे प्रभावशाली शक्ति।

(a) दो राजवंश शाखाएँ:

  • पश्चिमी कुषाण

  • पूर्वी कुषाण

(b) महत्वपूर्ण शासक:

  • कुजुल कडफिसेस

  • विम कडफिसेस

  • कनिष्क (सबसे महान)

कनिष्क का योगदान:

  • 78 ईस्वी: शक संवत का प्रारंभ

  • कुशीनगर में द्वितीय बौद्ध संगीति

  • गांधार कला का उत्कर्ष

  • रेशम मार्ग व्यापार


सातवाहन साम्राज्य (Satavahanas) (1st century BCE–3rd century CE)

स्थापक: सिमुक

सबसे महत्वपूर्ण शासक: गौतमीपुत्र शातकर्णी

  • शक-यवन-पालीव शासकों को हराया

  • नासिक अभिलेख में अपनी उपलब्धियाँ अंकित

सातवाहनों की विशेषताएँ:

  • दक्कन + आंध्र का नियंत्रण

  • दानपत्र (प्रशस्तियाँ)

  • ब्राह्मणवाद पुनरुत्थान


5. प्रशासनिक संरचना (Administration)

(a) विकेंद्रीकृत प्रशासन

मौर्य केंद्रीकरण के बाद शुंग–काण्व ने स्थानीय शक्तियों को बढ़ावा दिया।

(b) सेना

  • घुड़सवारों पर बल

  • विदेशी सैनिकों का उपयोग

(c) भूमि–राजस्व

  • कृषि राजस्व

  • चारागाह कर

  • सीमा शुल्क

(d) प्रांतीय शासन

  • आहो क्षत्रप

  • महासामंत

  • विहाराध्यक्ष (बौद्ध संघों में)


6. आर्थिक परिवर्तन और व्यापार

यह काल भारतीय व्यापार का स्वर्ण युग था।

मुख्य कारण:

  1. रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार

  2. रेशम मार्ग का विकास

  3. समुद्री व्यापार मार्गों का उन्नयन

निर्यात:

  • मोती

  • मसाले

  • वस्त्र (विशेषकर मलमल)

  • कीमती पत्थर

आयात:

  • सोना

  • दास

  • वाइन


7. सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश

(a) संस्कृत का पुनरुत्थान

शुंग एवं काण्व काल में संस्कृत साहित्य का विकास तेज़।

(b) बौद्ध–जैन धर्म का प्रसार

Indo-Greek, शक, कुषाण शासकों का दान–संरक्षण।

(c) मिश्रित संस्कृति

  • इंडो-ग्रीक कला

  • शक और पार्थियन परिधान

  • कुषाण प्रशासनिक मॉडल


8. बौद्ध एवं जैन धर्म का पुनरुत्थान

बौद्ध धर्म

  • कनिष्क के संरक्षण में महायान का विकास

  • नालंदा और तक्षशिला का उत्थान

जैन धर्म

  • पश्चिम भारत (गुजरात-राजस्थान) में वृहद विस्तार

  • सातवाहन संरक्षण


9. कला, वास्तुकला और मूर्तिकला

(a) गांधार कला (Greco-Buddhist Art)

  • यवन प्रभाव

  • यथार्थवादी मूर्तिकला

  • बुद्ध की मानव आकृति का प्रथम प्रदर्शन

(b) मथुरा कला

  • स्वदेशी शैली

  • लाल बलुआ पत्थर का उपयोग

(c) स्तूप निर्माण

  • सांची

  • भरहुत

  • अमरावती


10. सिक्कों का इतिहास

इंडो-ग्रीक सिक्के

  • चांदी और सोने के

  • युग्म लेख

शकों के सिक्के

  • क्षत्रपों द्वारा जारी

कुषाण सिक्के

  • बहुदेववादी चित्रण

  • सोने की उच्च मात्रा


11. व्यापार मार्ग

(a) स्थल मार्ग

  • तक्षशिला – पुशकलावती – बामियान

(b) समुद्री मार्ग

  • बारबरिकम (सिंध)

  • भरूच

  • तम्रलिप्ति


12. शिक्षा और साहित्य

संस्कृत साहित्य

  • कालिदास (उत्तर काल में)

  • अश्वघोष: बुद्धचरित

  • नागार्जुन: मध्यमक दर्शन

संस्कृत का उभार

कनिष्क ने संस्कृत को राजकीय महत्व दिया।


13. उत्तर–मौर्य काल की प्रमुख विशेषताएँ

  1. अनेक राजवंशों का उदय

  2. विदेशियों का भारत में बसाव

  3. भारतीय–यवन–शक–कुषाण संस्कृति का मिश्रण

  4. बौद्ध–जैन धर्म का उत्कर्ष

  5. व्यापार का स्वर्ण युग

  6. कला–मूर्तिकला का वैश्विक उन्नयन

  7. शहरीकरण का विकास


14. UPSC/PCS के लिए HIGH-YIELD POINTS

  • कनिष्क → महायान बौद्ध धर्म

  • मेनांडर → नागसेन संवाद

  • रुद्रदामन → जूनागढ़ अभिलेख

  • सातवाहन → गौतमीपुत्र शातकर्णी

  • गोंडोफर्नस → थॉमस परंपरा

  • कुषाण सोने के सिक्कों के प्रसिद्ध शासक → विम कडफिसेस और कनिष्क

    UPSC नोट: विम कडफिसेस = First issuer of heavy gold coins in India.


15. FAQs

Q1. उत्तर–मौर्य काल में कौन-सी कला शैली सर्वाधिक विकसित हुई?

उत्तर: गांधार और मथुरा कला।

Q2. कौन सा विदेशी शासक बौद्ध धर्म से प्रभावित हुआ?

उत्तर: मेनांडर (मिलिंद)।

Q3. रेशम मार्ग व्यापार का श्रेय किस शक्ति को जाता है?

उत्तर: कुषाण साम्राज्य।


16. MCQs

1. महायान बौद्ध धर्म का संरक्षण किसने किया?

A. रुद्रदामन
B. मेनांडर
C. कनिष्क
D. गोंडोफर्नस
उत्तर: C

2. जूनागढ़ अभिलेख किसने जारी किया?

A. शातकर्णी
B. रुद्रदामन
C. कडफिसेस
D. पुष्यमित्र
उत्तर: B

3. मिलिंदपन्हा किससे संबंधित है?

A. नागार्जुन
B. अश्वघोष
C. नागसेन और मेनांडर
D. बसोबिंसु
उत्तर: C


17. स्रोत

  • Romila Thapar – A History of India

  • D.N. Jha – Ancient India

  • Upinder Singh – Ancient Past

  • NCERT: Themes in Indian History Part-I

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