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BHIC-101 Unit–9 Notes | मौर्योत्तर काल: शुंग, काण्व, इंडो-ग्रीक, शक, कुषाण | Post-Mauryan Period | IGNOU History Notes for UPSC

IGNOU BHIC-101 | Unit–9 मौर्योत्तर काल (Shunga • Kanva • Indo-Greek • Saka • Kushana)

 IGNOU BHIC-101 Unit 9 Notes in Hindi: यह यूनिट मौर्योत्तर काल (Post-Mauryan Period) पर आधारित है, जो IGNOU B.A. History (Hons.) के पाठ्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खंड में मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में उभरे नये राजवंशों—शुंग, काण्व, इंडो-ग्रीक (यवन), शक, और कुषाण—के राजनीतिक विस्तार, सांस्कृतिक प्रभाव, तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।

यूनिट में पु्ष्यमित्र शुंग द्वारा वैदिक परंपराओं के पुनर्जागरण, इंडो-ग्रीक शासकों के सिक्कों और कला-संस्कृति में योगदान, शक–कुषाणों के मध्य एशियाई प्रभाव, व्यापारिक मार्गों (विशेषकर रेशम मार्ग), तथा कुषाण काल की आर्थिक समृद्धि, मुद्रा प्रणाली और धार्मिक सहिष्णुता जैसे विषयों को विस्तार से समझाया गया है। यह वह दौर था जब भारत में राजनीतिक विखंडन के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतर-क्षेत्रीय व्यापार का उल्लेखनीय विकास हुआ।

यह सामग्री न केवल IGNOU छात्रों के लिए बल्कि UPSC, SSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। इन नोट्स को IGNOU Syllabus और UPSC Ancient History Syllabus दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी मौर्य-पतन के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में हुए राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तनों को गहराई से समझ सकें।

नीचे दिए गए नोट्स में विषयवार संक्षिप्त व्याख्या, प्रमुख तथ्य, तथा परीक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक बिंदु शामिल किए गए हैं — जो आपके IGNOU Assignments और UPSC Prelims–Mains दोनों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होंगे।

BHIC-101 | Unit–9 – मौर्योत्तर काल (Post-Mauryan Period: Shunga, Kanva, Indo-Greeks, Sakas, Kushanas)


परिचय (Introduction)

अशोक की मृत्यु (232 ई.पू.) के पश्चात मौर्य साम्राज्य शीघ्र ही पतन की ओर अग्रसर हुआ।
185 ई.पू. में बृहद्रथ की हत्या के साथ मौर्य साम्राज्य का अंत हुआ और
भारत में अनेक स्वतंत्र राजवंशों और विदेशी शक्तियों का उदय हुआ।

इस काल को मौर्योत्तर काल (Post-Mauryan Period) कहा जाता है,
जो लगभग 185 ई.पू. से 300 ई. तक फैला रहा।

यह काल भारतीय इतिहास में राजनैतिक विखंडन, सांस्कृतिक मिश्रण और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का काल था।


मौर्य पतन के कारण (Reasons for Mauryan Decline)

कारण

विवरण

राजनीतिक कमजोरी

अशोक के पश्चात कमजोर उत्तराधिकारी।

अत्यधिक केन्द्रीयकरण

विशाल साम्राज्य का प्रशासन कठिन।

आर्थिक संकट

कल्याणकारी नीतियों से राजकोष खाली।

स्थानीय विद्रोह

प्रांतीय शासकों की स्वायत्तता।

बाहरी आक्रमण

यूनानी व शक आक्रमण।

📍 परिणामस्वरूप भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित हो गया।


शुंग वंश (Shunga Dynasty)

समयावधि: 185 ई.पू. – 75 ई.पू.

संस्थापक: पुष्यमित्र शुंग

  • मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या कर सत्ता ग्रहण की।

  • राजधानी: पाटलिपुत्र

  • ब्राह्मण वर्ग का पुनरुत्थान; बौद्ध धर्म की उपेक्षा की धारणा।

  • अश्वमेध यज्ञ का आयोजन।

  • पश्चिमोत्तर आक्रमणों का सफल प्रतिकार।

स्रोत: गर्गी संहिता, पातंजलि महाभाष्य, बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान


उत्तराधिकारी:

अग्निमित्र शुंग (नाटक मालविकाग्निमित्र में वर्णित – कालिदास रचित)।

  • शुंगों के अधीन कला और स्थापत्य का विकास हुआ।

सांस्कृतिक उपलब्धियाँ:

  • सांची और भरहुत स्तूपों का पुनर्निर्माण।

  • बौद्ध कला में लोकतत्वों का समावेश।


कण्व वंश (Kanva Dynasty)

समयावधि: 75 ई.पू. – 30 ई.पू.

  • शुंग वंश के बाद सत्ता प्राप्त की।

  • स्थापक: वसुदेव कण्व।

  • केवल चार शासक, अल्पकालिक शासन।

  • अंततः आंध्र (सातवाहन) वंश ने कण्वों को समाप्त किया।


यूनानी / इंडो-ग्रीक शासन (Indo-Greek Rule)

पृष्ठभूमि:

  • सिकंदर (Alexander) के आक्रमण (326 ई.पू.) के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में यूनानी बस्तियाँ बनीं।

  • सेल्युकस निकेटर के उत्तराधिकारी डेमिट्रियस (Demetrius) ने भारत पर आक्रमण किया (लगभग 190 ई.पू.)।


प्रमुख शासक:

शासक

योगदान

डेमिट्रियस

भारत में इंडो-ग्रीक शासन की नींव रखी।

मेनेंडर (मिलिंद)

सबसे प्रसिद्ध; मिलिंदपन्हो में वर्णित – नागसेन से संवाद।

एपोलोडोटस

सिक्कों पर दो भाषाएँ – यूनानी व खरोष्ठी।

एंटिआलसिडस

देवताओं के प्रतीक चिह्न।

विशेषता: सिक्कों पर चित्रांकन व लेखन की श्रेष्ठ कला।

मिलिंदपन्हो बौद्ध धर्म और तर्कशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।


शक (Saka) शासन

पृष्ठभूमि:

  • मध्य एशिया से आए सिथियन (Scythian) समूह।

  • भारत में उनका प्रवेश 2वीं शताब्दी ई.पू. में हुआ।

  • मध्य एशिया → बलूचिस्तान → गुजरात → मध्य भारत


प्रमुख शासक:

शासक

राज्य

उपलब्धियाँ

मौस

पश्चिमी भारत

पहला शक शासक

रुद्रदामन-I

पश्चिमी क्षत्रप (सौराष्ट्र)

गिरनार शिलालेख – संस्कृत का प्रथम दीर्घ लेख

नहपान

पश्चिमी भारत

व्यापार का विकास

गिरनार लेख – सिंचाई प्रणाली (सुदर्शन झील) का उल्लेख।


कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire)

समयावधि:

1वीं से 3री शताब्दी ई.
राजधानी – पुरुषपुर (पेशावर) और मथुरा

प्रमुख शासक:

शासक

विशेषता

कुजुल कडफिसेस (Kujula Kadphises)

कुषाण साम्राज्य की नींव।

विम कडफिसेस

भारत में स्वर्ण मुद्रा का प्रचलन।

कनिष्क (78 ई.)

महानतम कुषाण शासक – बौद्ध धर्म का संरक्षण।


कनिष्क के योगदान:

  1. बौद्ध धर्म का चौथा संघ परिषद (Council) – कश्मीर में।

  2. महायान बौद्ध धर्म को राज-धर्म का दर्जा।

  3. गंधार कला शैली (Gandhara Art) – यूनानी और भारतीय कला का समन्वय।

  4. स्वर्ण मुद्राएँ (Gold Coins) – कला और व्यापार का उत्कर्ष।

  5. राजधानी: पुरुषपुर (पेशावर)।

संस्कृति समन्वय: भारतीय, यूनानी, फारसी और मध्य एशियाई तत्वों का मिश्रण।


सातवाहन वंश (Satavahana Dynasty)

समयावधि:

1वीं शताब्दी ई.पू. – 3री शताब्दी ई.
राजधानी – प्रतिष्ठान (पैठण)

प्रमुख शासक:

शासक

उपलब्धियाँ

सिमुक

वंश का संस्थापक

गौतमिपुत्र शातकर्णी

सबसे महान शासक; शक नहपान को पराजित किया

वशिष्ठीपुत्र पुलुमावी

व्यापार का विस्तार, रोमन संबंध

नासिक प्रशस्ति – गौतमी बालश्री द्वारा पुत्र की प्रशंसा।

नीति:

  • वैदिक धर्म का समर्थन, पर धार्मिक सहिष्णुता।

  • स्थानीय स्वशासन की परंपरा।


सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य

समाज:

  • वर्ण व्यवस्था लचीली; व्यापारियों और शिल्पियों की स्थिति उन्नत।

  • स्त्रियों को दान और भूमि का अधिकार प्राप्त।

धर्म:

  • बौद्ध और जैन धर्म का संरक्षण जारी।

  • महायान बौद्ध धर्म का प्रसार।

  • हिन्दू धर्म में शिव, विष्णु और शक्ति पूजा का विकास।

कला और स्थापत्य:

  1. सांची, भरहुत, अमरावती – स्तूप व रेलिंगों का विकास।

  2. गंधार और मथुरा कला – मूर्तिकला का उत्कर्ष।

  3. साँची स्तूप – शक-कुषाण कालीन स्थापत्य का उदाहरण।


UPSC + IGNOU एकीकृत तालिका

IGNOU Unit

UPSC विषय

प्रमुख फोकस

Unit–9

मौर्योत्तर काल

शुंग, शक, कुषाण, सातवाहन

GS Paper–1

Ancient India

Indo-Greek, Kushana, Gandhara Art

Art & Culture

Buddhist Art

Sanchi, Gandhara, Mathura Styles

World History

Cultural Exchange

India-Central Asia Link


संभावित प्रश्न (IGNOU + UPSC)

  1. मौर्योत्तर भारत की प्रमुख राजनैतिक प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।

  2. कुषाण कालीन संस्कृति को “भारत का स्वर्ण युग” क्यों कहा जाता है?

  3. गंधार और मथुरा कला की विशेषताएँ बताइए।

  4. मौर्योत्तर काल के सामाजिक व धार्मिक परिवर्तनों का विश्लेषण कीजिए।

  5. सातवाहन और शक शासकों की नीतियों की तुलना कीजिए।


विश्लेषण (Analysis)

मौर्योत्तर काल भारतीय इतिहास में संक्रमण और समन्वय का युग था।
राजनीतिक रूप से भारत विभाजित हुआ, परंतु सांस्कृतिक रूप से एकजुट बना रहा।
विदेशी शासकों (यूनानी, शक, कुषाण) ने भारत की कला, धर्म और व्यापार को
अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया।

यह काल भारतीय संस्कृति की उस सिंथेटिक (संमिश्र) आत्मा को दर्शाता है
जहाँ विदेशी और स्वदेशी तत्व एकीकृत होकर “भारतीयता” का नया रूप गढ़ते हैं।


सारांश (Summary – 5 Points)

  1. मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में अनेक स्वतंत्र राज्य उभरे।

  2. शुंग और सातवाहन – स्वदेशी वंश; यूनानी, शक, कुषाण – विदेशी वंश।

  3. कला में गंधार, मथुरा, सांची और अमरावती शैली का विकास हुआ।

  4. व्यापारिक संपर्कों से भारत की अर्थव्यवस्था सशक्त हुई।

  5. धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय इस युग की पहचान बने।


निष्कर्ष (Conclusion)

मौर्योत्तर काल ने भारत को संस्कृति और अंतरराष्ट्रीयता का नया दृष्टिकोण दिया।
राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, यह युग कला, धर्म और व्यापार का स्वर्णकाल था।
विदेशी शासकों ने भारतीय संस्कृति में विलय होकर “भारत की वैश्विक पहचान” को मजबूत किया।

इस प्रकार, मौर्योत्तर काल भारतीय इतिहास में “संघर्ष से समन्वय तक की यात्रा” का प्रतीक है।

BHIC-101: भारत का इतिहास – I (History of India – From Earliest Times to 300 CE)

नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से आप इस पेपर की सभी यूनिट्स के विस्तृत नोट्स देख सकते हैं। प्रत्येक यूनिट को IGNOU और UPSC दोनों दृष्टियों से तैयार किया गया है।

 यूनिट-वार नोट्स:

1️. BHIC-101 Unit 1: भारत की प्रागैतिहासिक संस्कृतियाँ (Prehistoric Cultures of India)
2️. BHIC-101 Unit 2: धातु युगीन संस्कृतियाँ (Chalcolithic & Iron Age Cultures)

3. BHIC-101 Unit 3:सिंधु सभ्यता

4. BHIC-101 Unit 4: वैदिक सभ्यता

5. BHIC-101 Unit 5: लौह युग व राज्य निर्माण

6. BHIC-101 Unit 5A: 16 महाजनपद और गणराज्य

7. BHIC-101 Unit 6: धार्मिक आंदोलन – बौद्ध, जैन, आजीवक

8. BHIC-101 Unit 7: नंद व मौर्य साम्राज्य

9. BHIC-101 Unit 8: मौर्य प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था

10. BHIC-101 Unit 9: मौर्योत्तर भारत – शुंग, सातवाहन, कांबोज प्रभाव

11. BHIC-101 Unit 10: मौर्योत्तर काल से गुप्त युग तक की सांस्कृतिक निरंतरता


सभी नोट्स को UPSC और IGNOU दोनों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर सरल भाषा में तैयार किया गया है ताकि विद्यार्थी एक ही स्रोत से दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।

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